August 28, 2019

व्यवसायी पुरूष- नामानि


व्यवसायी पुरूष- नामानि


बढ़ई                 Carpenter        तक्षकः
डाक्टर              Doctor             चिकित्सकः
राजमिस्त्री        Mason             स्थपतिः
दर्ज़ी                  Tailor               सौचिकः
नाई                  Barber             नापितः
डाकिया             Postman          पत्रवाहकः
खजाँची             Cashier            कोषाध्यक्षः
ग्वाला               Milkman          गोपः
कुम्हार             Potter              कुम्भकारः
किसान             Farmer            कृषकः
जुलाहा              Weaver           तन्तुवायः
सुनार               Goldsmith        स्वर्णकारः
मोची                Cobbler           चर्मकारः
हलवाई             Confectiner     कान्दविकः
लुहार                Blacksmith      लौहकारः
धोबी                 Washerman    रजकः
गडरिया            Herdsman       पशुपालकः
मेहतर              Sweeper          मार्जकः

February 16, 2016

Sanskrit Shlok

आज का श्लोक

आपत्सु मित्रं जानीयात् युद्धे शूरमृणेशुचिम् ।
भार्यां क्षीणेषु वित्तेषु व्यसनेषु च बान्धवान् ॥

अन्वय

आपत्सु मित्रं, युद्धे शूरम्, ऋणे शुचिम्,क्षीणेषु वित्तेषु भार्यां, व्यसनेषु च बान्धवान् जानीयात् ।

अर्थात्

कठिनाइयों में मित्र को, युद्ध में बलशाली को, कर्ज में गुणी को, धन के नष्ट होने पर पत्नी को, और विपत्तियों में सम्बन्धियों को जानो ।

Meaning in English
 
Friend in difficulties, The powerful in war, In debt the virtuous, The wife in wealth destruction,

And know relatives in plagues.

December 8, 2015

संस्कृत वर्णमाला (The Sanskrit Alphabet)

 वर्णमाला
(The Alphabet)


संस्कृत में कुल ४६ वर्ण होते हैं । जिसमें १३ स्वर, ३३ व्यंजन हैं ।
वर्ण भाषा की वह इकाई है जिसके और खण्ड नहीं हो सकते । वर्ण दो प्रकार के होते हैं-

11) स्वर    स्वर वर्ण के उच्चारण में किसी अन्य वर्ण की सहायता नहीं ली जाती । ये १३ स्वर इस प्रकार हैं-

क) सामान्य स्वर - अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ
ख) मिश्रित स्वर  - ए, ऐ, ओ, औ, ॠ, लृ

  2)  व्यंजन   ये कुल ३३ हैं-

स्पर्श-वर्ण                कवर्ग   क्  ख्  ग्  घ्  ङ्
चवर्ग   च्  छ्  ज्  झ्  ञ्
टवर्ग    ट्  ठ्  ड्  ढ्  ण्
तवर्ग    त्  थ्  द्  ध्  न्
पवर्ग    प्  फ्  ब्  भ्  म्

अन्तःस्थ                 य्  र्  ल्  व्

ऊष्म                               श् ष्  स्  ह्

इनके अतिरिक्त अनुस्वार (.) और विसर्ग (:) व्यंजन वर्णमाला में न होते हुए भी वर्णों की ही तरह कार्य करते हैं ।

संयुक्त व्यंजन

क्+ष् = क्ष्               त्+र् =त्र्                  ज्+ञ् =ज्ञ्

ये तीन व्यंजन भी वर्णमाला में प्रयोग किये जाते हैं । यथा - कक्ष, छात्र, यज्ञ आदि ।

वर्ण-विच्छेद

वर्ण से बड़ी इकाई शब्द है जो वर्णों (स्वर तथा व्यंजन) के मेल से बनती है । इसे निम्नलिखित शब्दों के वर्ण-विच्छेद (अलग-अलग करने) से समझें -

छात्र = छ्+आ+त्+र्+अ
छात्रा = छ्+आ+त्+र्+आ
रमा = र्+अ+म्+आ
बालक = ब्+आ+ल्+अ+क्+अ

अकारान्त शब्द

यदि शब्द का अंतिम वर्ण ’अ’ हो तो वह अकारान्त कहलाता है । यथा - राम, बालक, छात्र, अध्यापक, वृक्ष, पुस्तक इत्यादि ।

आकारान्त शब्द

यदि शब्द का अंतिम वर्ण ’आ’ हो तो वह आकारान्त कहलाता है । यथा - रमा, बालिका, छात्रा, अध्यापिका, चेतना आदि ।

November 27, 2015

Sanskrit Shlok

श्लोक

रूप-यौवन-सम्पन्नाः विशाल-कुल-सम्भवाः ।
विद्याहीनाः न शोभन्ते निर्गन्धाः इव किंशुकाः ॥

अन्वय

(ये) रूपयौवनसम्पन्नाः, विशाल-कुल-सम्भवाः, विद्याहीनाः (सन्ति । ते) निर्गन्धाः किंशुकाः इव न शोभन्ते ।

अर्थात्

(जो लोग) सुंदर रूप, युवावस्था से युक्त, ऊँचे कुल में उत्पन्न, विद्या से हीन (हैं । वे) बिना सुगंध वाले पलाश के फूल के समान शोभा नहीं करते हैं । 

Meaning in English


(The people) who are beautiful and fitted with puberty, Born in a higher clan and are 
knowledge deficient. (They) do not suit as like a Bastard Teak flower which is  without
any fragrance.

November 26, 2015

Sanskrit Shlok

श्लोक

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

अन्वय

गुरुः ब्रह्मा (अस्ति), गुरुः विष्णुः (अस्ति), गुरुः देवः महेश्वरः (च अस्ति), गुरुः साक्षात् परब्रह्म (अस्ति), तस्मै श्रीगुरवे  नमः ।

अर्थात्

गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं और गुरु महादेव हैं । गुरु ही प्रत्यक्ष भगवान हैं । इसलिये अपने गुरु को नमस्कार करो । 
Meaning in English


Brahma is the master, Vishnu is the master and Shiva is also the master. Master is directly God, So  greet your master.

November 23, 2015

Sanskrit Shlok

श्लोक

उद्यमेन हि सिध्यन्ति, कार्याणि न मनोरथैः ।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगः ॥

अन्वय

(यथा) सुप्तस्य सिंहस्य मुखे मृगाः न हि प्रविशन्ति ॥ (तदैव) कार्याणि उद्यमेन हि सिध्यन्ति मनोरथैः  न (सिध्यन्ति) ।

अर्थात्

जिस प्रकार सोते हुए शेर के मुख में मृग स्वयं ही प्रवेश नहीं करता है, उसी प्रकार कार्य परिश्रम से ही सफल होते हैं, इच्छाओं से नहीं ।

Meaning in English


As the antelope does not enter the sleeping lion’s mouth by itself, In the same way we can succeed in our work only if we work hard not from desires.

November 14, 2015

Sanskrit Shlok

श्लोक

हंस श्वेतः बकः श्वेतः, को भेदः बकहंसयोः ।
नीरक्षीरविवेके तु हंसो हंसः बको बकः ॥

अन्वय

हंस श्वेतः बकः श्वेतः, बकहंसयोः कः भेदः ? नीरक्षीरविवेके तु हंसः हंस, बकः बकः ॥

अर्थात्

हंस सफेद है, बगुला सफेद है, तो हंस और बगुले में क्या भेद है ? जिस प्रकार पानी और दूध में भेद करने के ज्ञान से पानी, पानी होता है और दूध , दूध होता है । उसी प्रकार हंस, हंस होता है, बगुला, बगुला ही होता है ।

Meaning in English

Swan is white, heron is white then what is the difference between swan and heron?

The way to distinguish water and milk, water is water and milk is milk. Similarly the swan is swan & the heron is heron.

श्लोक

श्लोक श्रूयतांधर्मसर्वस्वंश्रुत्वाचैवावधार्यताम्। आत्मन्ःप्रतिकूलानिपरेषां न समाचरेत्॥ अन्वयः धर्मसर्वस्वंश्रूयतां, श्रुत्वा ...